बूढी माँ और जादू – Bachoon ki kahani

बूढी माँ और जादू – Bachoon ki kahani: नमस्कार कैसे हैं आप लोग? आज मैं दादी की कहानी पेटी में से एक कहानी ऐसा बताने जा रहा हूँ,जो सईद आपको सुनकर मजा आएगा, लेकिन दोस्तों उससे पहले अगर आप हमारे कहानी को पढ़ते है, तो भाई कमेंट करके बताए, की आपको कहानी कैसे लगता है, पता नहीं की मेरी कहानी आपको पसंद आ रही है या नहीं।

बारिश का मौसम था, और उस के बूंदें रात में भी धीमे धीमे रफ़्तार से पड़ रहे थे, माहौल ऐसा बन गया था जैसे किसी को प्यार हो गया हो, अगर इस माहौल में कोई आएगा तो वो भी प्रकृति की इस प्यार के समुद्र में डूब जायेगा, में भी बहार गया, क्यों की मैं अपने आपको रूक नहीं पाया, बस दरवाज़ा खोला और बहार चला गया, पता नहीं था क्या होगा, पता नहीं था क्यों जा रहा हूँ।

माँ बोल रही थी अगर बहार गया तो टांगे तोड़ दूंगी तेरी, माँ भी अजीब है, कितना ख़याल रखती है सबका, मेरा तो वो खास ध्यान रखती है, लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था, बिना कुछ सोचे समझे चला गया बहार, और बहार जाते ही, वाह क्या रात है, मन करता है, इस रात में ही अपने आप को समर्पित कर दूँ, मन करता है की यह रात कभी सुबह में ना बदले.

यूँ तो मैं अंधेरा से डरता हूँ, लेकिन जब अंधेरा ही इतनी खूब सूरत हो, तो उसे तो प्रेम की असा रखना चाहिए। मैं अपने ही धुन में व्यस्त था, उतने ही में एक बूढ़ी माँ चल कर आई, और मुझे कहा >> क्यों बेटा बहार क्यों घूम रहे हो ? तुम्हें दर नहीं लगता ? जाओ जाओ तुम्हें सर्दी लग जाएगी।मे ने कहा बूढ़ी माँ मुझे तो सर्दी लग जाएगी, लेकिन आप तो ऊपर चली जाएगी, इसलिए आप पहले घर जाओ, यह सुन कर बूढ़ी माँ थोड़ा मुस्कुराई और कही, अब तो कुछ महसूस नहीं होता। क्या सर्दी क्या गर्मी, सब एक समान हो चुके है।मैं उनकी बातों को नहीं समझ पाया, लेकिन मुझे लगा की क्यों न बूढ़ी माँ के साथ थोड़ा मज़ाक किए जाए ! और यह सोच कर मे ने उनके साथ मस्ती करने लगा, मैं उनके लाठी को चीन लेता था, और बूढ़ी माँ गिर जाती थी, फिर मैं उनकी बाल को खींच रहा था, और बूढ़ी माँ चिलाती, अरे रहने दे, रहने दे।

बूढी माँ और जादू – Bachoon ki kahani

अचानक मे ने उनकी आँखों में आँसू देखा, जो दूर से नहीं दीखता, अगर आपके पास दिल है, अगर आप एहसास को समझ सकते है, तो आपको वो आँसू की एहसास अभी ज़रूर होगा, हलाकि बूढ़ी माँ रू रही थी, लेकिन फिर भी खुश थी, पता नहीं यह क्या सिलसिला था, लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझसे कोई गलती हो गया है।लेकिन फिर मेरे मन में सवाल आ रहा था की अगर मे ने गलती की है, तो बूढ़ी माँ के चेहरे पर यह अजीब सी खुशी क्यों है, जो आँसू को भी अपने प्रभाव से रंगीन बना रहा है ? फिर मे ने बूढ़ी माँ से पूछा, की बूढ़ी माँ ,,,,,, इतने ही में बूढ़ी माँ बोली।

  • बूढ़ी माँ – पास नहीं आना, दूर रहो मुझसे, मैं तुम्हें नहीं जानती, दूर चले जाओ, दूर चले जाओ, दूर चले जाओ …..

यह कहे कर बूढ़ी माँ और ज्यादा रोने लगी, मुझे समझ में नहीं आया क्या हो रहा है ? और उनकी इस बर्ताव से मैं भी थोड़ा दर गया था। फिर मे ने साहस करके उनके तरफ बढ़ा, और उन्हें गले लगाया, क्यों की मेरी दादी कहती थी, की हर चीज का हल गले लगाने से मिल जाता है, इसलिए मे ने उन्हें गले लगाया, इस उम्मीद से की वो ठीक हो जाएँगी।

जैसे ही मे ने उन्हें गले लगाया तो वो भी मुझसे लिपट गई, और बोली मेरा मुना , यह कहकर उन्होंने मेरे गाल को चूमने लगी, लेकिन मैं अभी भी हैरान था, की यह मुना कोन है ? मेरा नाम तो विश्वनाथ है, तो यह मुझे मुना कहे कर क्यों बोल रहीं है ?फिर मे ने पूछा की बूढ़ी माँ तुम मुझे मुना क्यों केहेरही हो ? मेरा नाम विश्वनाथ है।

  • बूढ़ी माँ – हाँ जानती हूँ, जानती हूँ, बस वो याद आ गया।
  • मैं – कोन बूढ़ी माँ ?
  • बूढ़ी माँ – एक प्यारा सा फूल, जो सिर्फ मेरा था, जिसे पा कर मुझे लगा था की मे ने सारा दुनिआ जीत लिए, मेरे बगीचा में वो फूल बहुत खूब सूरत था।
  • मैं – तो अब वो फूल कहाँ है ? आपको पता है हमारे बगीचे में बहुत सारे फूल उगते है, सुभे आपको वो सभी मिलेंगे, आपको जितना चाहिए ले जाना। लेकिन तुम जल्दी आना नहीं तो सुरेश चाचा सारे फूल ले।

बूढ़ी माँ थोड़ा हंसी और बोली।

बूढ़ी माँ – हाँ बेटा हर फूल को कोई न कोई ले जाता है। उन्हें कोन रूक सकता है।

दोस्तों कहानी अभी जारी है, यह कहानी का अगला भाग मैं जल्द ही लेकर आऊँगा, जुड़े रहिए हमारे साथ,

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