बगुला मछलियाँ और जंगल – Story in Hindi

बगुला मछलियाँ और जंगल – Story in Hindi: लालच बुरी बाला है, और आजके समय में हर कोई लालच से ग्रसित है, क्यों की यह कलयुग है, और इस युग में इंसान मजबूर हो कर लालच के चपेट में आ ही जाता है, और इन बातों को ध्यान में रखते हुए मैं आज आपको एक ऐसा कहानी सुनाने वाला हूँ, जो आपके लालच को ख़तम कर सकता है।

दादी माँ भी कमाल की हैं, बचपन में मुझे इतने सारे कहानी सुनाए, जिनको आज याद करता हूँ तो पूरी दुनिआ उल्टा नजर आता है, मुझे ऐसा महसूस होता है, की आज दादी की कहानी का कोई मतलब नहीं है, तो चाहिए आपका बिना समय नष्ट किए सीधा कहानी के तरफ ले चलता हूँ।

बगुला मछलियाँ और जंगल – Hindi kahani

एक ज़माने में मछली पुर नाम का एक जंगल हुआ करता था, और उस जंगल में एक तलाव था, जिसका पानी कभी नहीं सूखता था, और उस तालाब में लाखों मछली रहते थे, झींगा केकड़ा, रूही, मेंढक यह सब एक साथ मिल कर रहते थे, किसी का किसी से बेर नहीं था।

लेकिन आज का समय बदल गया है, खुद इंसान खुद का नहीं होता। खेर जो भी है, हम कहानी में ध्यान देते है।

मछलिआँ तालाब में एक साथ रहते थे, कभी भी कोई भी सभा / party होता था, तो सब लोग साथ मिल कर मानते थे, एक दिन झींगा दीदी की शादी हुई, तो सब मछलिआँ शादी का मजा ले रहे थे, और उतने ही में अकास में एक बगुला उड़ता हुआ आया, वो बगुला बहुत थका हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे उसने कई दिनों से भोजन ग्रहण नहीं किआ है, और बगुला कुछ वार्ता लाभ भी कर रहा था।

बगुला : हे भगवान कृपया करके मुझे भोजन के पास ले चलिए, अब मुझसे सेहेन नहीं होता है, इतने दिन भूखे रहे के बाद अब तो पंखों में उड़ने का ताकत नहीं है, हे राम हे राम।

यह कहते हुए बगुला तलाव के पास आके बैठा, और कहने लगा धन्यवाद भगवान, आपने मुझे पानी का दर्शन करा दिए, प्यास से गाला सुख गया था। यह कहकर बगुला उत्साह में पानी पिने लगा।

पानी पीते हुए उसकी नजर तलाव में रहने वाले मछलिओं के ऊपर पड़ा, उसने देखा की तलाव में हजारों मछलिआं है, और जितना भी ले जाओ कभी ख़त्म नहीं होगा। तो बगुला के मन में लालच जन्म लिए, उसने सोचा की क्यों ना इन मछलिओं को ही अपना आहार बनाया जाए।

इससे मुझे मेहनत भी नहीं करना पड़ेगा, और ना ही मुझे कहीं जाने की जरुरत है, पानी और खाना दोनों यहां पर मौजूद है। यह सोच कर बगुले ने तलाव से एक मछली को अपने चोंच से पकड़ लिआ।

बगुला : वाह वाह क्या स्वादिष्ट भोजन है ! उम्मम्मम , यह कहे कर उसने और एक मछली को पकड़ लिए, और उसे निगल लिआ, ऐसा करके उस दिन बगुले ने बहुत सारे मछली को अपना शिकार बना लिआ।

तलाव में सभी मछलिआं बगुले की इस हरकत से डर गए, और सब लोग अपने अपने घर में चुप गए, बगुला हर सुभे होते ही तलाव के पास आ जाता था, और उसे जो भी मछली मिलता था उसे खा लेता था, बगुले की तो मनो लॉटरी निकल आया था, बिना मेहनत किए उसे सब कुछ मिल रहा था।

अब तलाव में पहले जैसा उत्सव नहीं हुआ, सब मछलिआं बहार आने से डरते थे, माहौल ऐसा बन चुका था जैसे किसी मरुभूमि में आ गया हो, बगुला अपने आप में खुश था, क्योंकि मछलिआं कभी ख़त्म नहीं होने वाले थे, और बगुला की भूख और लालच भी कभी ख़त्म नहीं होने वाला था।

लेकिन कहते है न, की बुरा वक्त एक ना एक दिन टल जाता है, तो मछलिओं का बुरा समय भी अब समाप्त होने वाला था।

दादी क्या केहेती है ?

दादी माँ मुझे हमेसा कहानी सुनते हुए यह केहेती थी, की मैं अपने आप से प्रतिज्ञां करों की मैं कभी भी किसी और के सम्पत्ति को अपना नहीं समझूंगा, और मैं उनके बातों पर हामी भर देता था, क्यों की मुझे कहानी जो सुन्ना होता था, उस वक्त मुझे कुछ समझ में नहीं आता था, की दादी ऐसा क्यों के-हेती है ? लेकिन आज मुझे एहसास होता है, की दादी क्यों ऐसा केहेती थी।

खेर बगुला का मछलिओं पर अत्याचार बढ़ते जा रहा था, और अचानक एक दिन जंगल में अकाल पड़ा, और जंगल के सारे पेड़ पौधे, नदी तलाव धीरे धीरे ख़त्म होने लगे, और इस तलाव का पानी भी ख़त्म होने लगा।

इस बात से सभी मछलिआँ परेशान थे, क्यों की कुदरत ने पहले ही उनके साथ इतना बड़ा अन्याय किआ था, और अब यह मुसीबत, अब तो उनके पास घर भी नहीं रहेगा, अब सभी मछलिओं ने यह सोचा था, की इस बार बगुला की सीकर होना निश्चित है, उनके बचने की कोई रास्ता नहीं है।

लेकिन हर गधों के झुंड में एक गधा होता है, जो बहुत बुद्धिमान होता है, इसी तरह इन मछलिओं के बिच में बूढी मान था केंकड़ा, उसने सोचा की क्यों ना दूसरे जंगल तक पहुँचने केलिए बगुला का ही इस्तेमाल किआ जाये ?

इसलिए केंकड़े ने रात को सभी मछलिओं की सभा बुलाया, जिसमे केंकड़े ने बगुला के जरिए दूसरे जंगल के तलाव तक पहुंचने का उपाय बताया , केंकड़े की बात सुन कर सभी मछलिआं प्रसन्न हुए, सबने तय किआ की कल सुबह इस तरकीब को जरूर अपनाएंगे।

सुबह हुई, और बगुला प्रतिदिन की तरह तलाव के किनारे में आके बैठ गया, उतने ही में केंकड़ा बहार आया और बगुले से कहा, की हे महा पुरुष आप कितने बलबान है, हम सब मछली तो आपके सामने तूच है, आप चाहें तो हमें चुटकिओं में मसल सकते है, कास मैं भी आपके तरह होता, तो। ……..

केंकड़ा की बात सुनके बगुला बहुत खुश हुआ, उसे लगा। कि जैसे उससे ज्यादा सक्तिसलि और कोई बनहि है, और वो इन मछलियों पर हसन कर रहा है।

बगुला बोला : अच्छा लगा, तुम्हारी बात सुनकर अच्छा लगा, मांगो क्या मांगते हो, में तुम्हे अबस्य दूँगा।
Hindi Kanani Bagula Aur Machlian aur Jungle

मेंकद : हे महापुरुष में तो एक तुछ प्राणी हूँ , जो मछलियों के तरह भी नही दिखता हूँ, लेकिन मैं इनके साथ रहता हूँ, और इन सबकी तरह मुझे भी अपनी जान प्यारी है।

आप तो जानते है, की अकाल के कारण अब इस तलाव का पानी सूखने लगे है, और हैम सबकी जान संकट में है,आप चाहें तो हमे बचा सकते है।

बगुला : माना कि मैं बलशाली हूँ, लेकिन इसमें में क्या कर सकता हूँ, यह तो कुदरत का खेल है।

केंकड़ा : हे बलबान आप पंछियों के प्रजाति में जन्म लिए है, जिसके कारण आप आसमान में उड़ सकते है, अगर आप चाहें तो हैम सबको आने चूंच से पकड़वाकर जंगल के दूसरे तरफ की तलाव में ले जा सकते है।

इससे आपका भोजन भी बच रहेगा, और हैम सबकी जान भी बच जाएगी।

बगुला : वाह, क्या सुझाव है, अच्छा है, काल में तुम सबको जंगल के उस पर लेचलूँगा ।

दूसरे दिन सुबह :

सारे मछली एक जगह पर इकठा हो गए और दूसरे तालाब तक जाने का उत्साह उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था ।

बगुला नदी के किनारे आया और कहा ।

बगुला : क्या आप सब मेरे साथ चलने केलिए तैयार है ?

सबने हैं कहा, तो बगुला कहा अछि बात है, तो कहलिए मेरे साथ।

फिर बगुला ने अपने चुच से कुछ मछलिओं को लेकर उड़ गया, पहेली बार उसने मछलिओं को दूसरे तलाव तक पहुंचाया, दूसरी बार भी उसने मछलिओं को तलाव तक पहुंचाया, लेकिन तीसरी बार बगुले के मन में लालच जगा, और उसने सोचा की क्यों न इन मछलिओं को अपना आहार बना लिए जाए, यह सोच कर बगुले ने इस बार मछलिओं को तलाव तक नहीं लेगया।

रस्ते में ही बगुला उन मछलिओं को अपना शिकार बनाया, और जब जब वो मछलिओं को लेकर जाता, वो मछली कभी तलाव तक नहीं पहुंचे, धीरे धीरे करके सारी मछलिआँ ख़त्म हो गई, और अब बारी थी केंकड़े की।

और केंकड़ा बगुले का हरकत से पहले ही वाक़िफ़ था, और उसने पहले ही अपना निर्णय ले चुका था, की अब बगुला इस दुनिआ में नहीं रहेगा, तो बगुला केंकड़े के पास गया और कहा, की अब तुम आख़िरी बचे हो, तुम्हें तलाव तक पहुंचा दूँ तो मेरा काम ख़त्म हो जायेगा, चलो मेरे चोंच को कास के पकड़ लो।

लेकिन केंकड़े का १० पेअर थे, इसलिए बगुला को उसे ले लेन में समस्या हुई, लेकिन बगुले को केंकड़े का मांस खाने में रूचि था, इसलिए बगुले ने कहा, की तुम तो बहुत अजीब किस्म के मछली हो, मैं तुम्हे कैसे ले जाऊं, तब केंकड़े ने कहाँ की, यह सत्य है, की मैं बहुत अजीब प्राणी हूँ, लेकिन मैं आपके साथ जा,सकता हूँ, अगर आपको समस्या ना हो, तो क्या मैं आपके गले में लटक कर जा सकता हूँ ?

बगुला कहा, तुम दीखते अजीब हो लेकिन बहुत बुद्धिमान हो, यह सुझाव तो मेरे दिमाग में नहीं आया, लेकिन अब तुमने तरकीब निकल ही ली है तो चलो फिर मेरे साथ।

बगुला की बात सुनकर केंकड़ा ने उसके गले को पकड़ लिए, और बगुला उसे लेकर उड़ गया, लेकिन रस्ते में जाते जाते बगुला एक सूखे पेड़ के तरफ गया, जहाँ कोई भी तलाव नहीं था, तो केंकड़े ने पूछा की यह तुम लेकर जा रहे हो ?

बगुला कहा फिक्र मत करो यह रास्ता तलाव तक पहुंचने का आसान तरीका है, लेकिन केंकड़ा को बगुले की योजना का आभास हो गया, और उसी समय केंकड़े ने बहुल का गाला को जोर से दबाने लगा, बोला चिलाया यह तुम क्या कर रहे हो ? चूड़ो मुझे मैं मर जाऊँगा, लेकिन केंकड़े ने बगुला की एक न सुनी, और गाला दबा कर उसे मार दिआ। इस तरह से बगुले का डर हमेसा के लिए समाप्त हो गया।

Conclusion:

तो देखा आपने लालच क्या कर सकता है, हमेसा लालच से ही विनास हो जाता है, इसलिए इंसान को कभी लालच नहीं करना चाहिए, इसी सिख के साथ मैं यह कहानी को एहि समाप्त करता हूँ, फिर मिलेंगे एक और दिलचस्प कहानी में, तब तक केलिए बिदय दें।

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