जादुई नदी, Moral stories in hindi – (2022)

जादुई नदी की कहानी: नमस्कार स्वागत है आपका एक और हिंदी कहानी मैं, इसतरह का कहानी मैं आपके साथ हमेशा करता हूँ, और आगे भी करता रहूँगा, मे ने आपके साथ वो कहानियाँ शेयर किआ है, जिन्हे मेने बचपन मैं अपने दादा दादी से सुना था, कभी कभी मेरे पापा और माँ भी कहानियाँ सुनाया करते थे .

लेकिन दादी माँ की कहानी मैं बहुत मजा आता था, कई बार तो मैं दादी माँ की कहानी से दर जाया करता था, और कई बार बहुत हँसता था। कई बार तो मैं दादी की कहानी सुनते सुनते कब सो जाता था पता ही नहीं चलता था। ऐसे ही एक कहानी है जादुई नदी जो आज मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ, नीचे पढ़िए।

जादुई नदी, moral stories in hindi

दादी माँ केहेती है : एक गाँव मैं दिनेश और सुरेश रहते थे, दोनों भाई थे, सुरेश बहुत चालाक और दिखने मैं सुन्दर था, इसलिए सभी गाओं वाले सुरेश की बात मानते थे, दिनेश की बातों का कोई मोल नहीं था, एक दिन सुरेश चालाकी से दिनेश का ज़मीन भी हड़प लिआ।

दिनेश की इस बेवकूफी से उसकी पत्नी बहुत नाराज़ हुई, रात को जब दिनेश खाना माँगा, तो उसके पत्नी ने कहा की अब तुम्हें खाना नहीं मिलेगा, जाओ पहले अपना ज़मीन छुड़ा कर लेके आओ, वर्ण घर मैं नहीं आना, बिचारा भोला भला दिनेश पत्नी की डांट सुनकर घर से बहार चला गया, लेकिन रात बहुत हो चुका था और गाओं मैं सब लोग अपने अपने घरों मैं बिसराम कर रहे थे, ऐसे दिनेश की फटी पड़ी थी, मतलब दिनेश काफी डरा हुआ था, फिर अचानक एक कुत्ते ने Waooo चिलाय, दिनेश को लगा कोई भूत है, और इसलिए वो भगा।

भागते भागते वो एक नदी के पास पहुंचा, और फिर सोचा की यह नदी कहाँ से आया पहले तो यहां पर नहीं था, उसे लगा की यह उस भूत का माया है, यह मुझे पानी मैं डूबा कर मार देना चाहता है, इसलिए दिनेश एक बड़ा सा पत्थर लिए और नदी मैं फ़ेंक दिए, यह देख कर नदी की देवी बहार आई और दिनेश से कहा।

जादुई नदी – Hndi Stories

नदी की देवी – क्या हुआ तुम मुझे मार क्यों रहे हो ?

दिनेश – तुम भूत हो न ? !!! तुम मुझे मरने आयी हो न ?

नदी की देवी – नहीं नहीं मैं कोई भूत नहीं हूँ, मैं तो सिर्फ एक नदी हूँ, मैं दूसरों की इच्छा पूरी करती हूँ, अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा भी इच्छा पूरी कर सकती हूँ।

दिनेश – क्या तुम इच्छा पूरी करती हो ? कहीं तुम इसके बदले मेरा जान तो नहीं लोगी न ?

नदी की देवी – नहीं नहीं मैं किसी को नहीं मारती, और न ही मैं किसी को कोई चोट पहुँचती हूँ, मागो क्या मांगते हो।

दिनेश – मैं बहुत कला हूँ, और मेरे पास कोई धन नहीं है, मेरा भाई मुझसे ज्यादा आमिर है, और बुद्धि मैं मुझसे कई ज्यादा ऊपर है, तो हे जादुई नदी की देवी, मुझे ऐसा वरदान दें जिससे मैं आमिर बन जाऊं, और मेरा चेहरा मेरे भाई से भी ज्यादा सुन्दर हो जाये।

नदी की देवी – जरूर आपको एहि वरदान मिलेगा, और जब भी आपको कुछ जरुरत पड़ेगा तो आप मुझसे मांग सकते है, मैं अबस्य उसे पूरा करूंगी, लेकिन याद रहे अगर आपने आपके दुसमन केलिए कुछ माँगा, तो उसका दोगना फ़ायदा आपको होगा।इतना कहे कर नदी की देवी वहां से चली गेय, और दिनेश के बातों के मुताबिक, उसका चेहरा गोरा हो गया, और उसके पास पैसा भी आने लगा हवा में उड़ते हुए, यह सब देख कर दिनेश का ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, वो तुरंत भगा अपना पत्नी के पास पहुंचा।

जादुई नदी – Bachoon ki kahani

लेकिन दिनेश की पत्नी नाराज़ और गुसा थी, तो वो बोली – क्यों रे कलमुहे आगेया फिर से ज़मीन छोड़ा लिए ? अगर हाँ तो ही तुम घर मैं आना, वर्ण घर का दरवाज़ा तुम्हारे लिए बंद है।

दिनेश हंसा और कहा अब हमें इसकी कोई जरुरत नहीं है, डार्लिंग आज मैं बहुत खुश हूँ, आजके बाद हमें किसी भी चीज की कोई जरुरत नहीं है, तुम चिंता मत करो।

दिनेश की पत्नी मन मैं सोच रही थी, की क्या यह पागल हो गया है क्या ? कहीं दारू वरु पीकर तो नहीं आया है न ? और इसका चेहरा इतना सुन्दर कैसे हो गया है ? यह सोच कर बोली – क्या हुआ तुम्हे आज भांग पीकर ए हो क्या ?और तुम्हारा चेहरा इतना गोरा कैसे हो गया ?

दिनेश ने कहा एक जादू से, और मैं इसके बारे मैं तुम्हें बता नहीं सकता, तुम सिर्फ आम खाओ, गुटली क्यों गिनते हो। दिनेश का पत्नी भी चुप रही वो और कुछ कहे नहीं पाई। औरतें ऐसे ही होती है, जहाँ कुछ समझ मैं नहीं अत है वहां वो कुछ बूल नहीं पाती, झगड़ा भी नहीं कर पाती।

दूसरे दिन दिनेश को गाओं वालों ने देख कर चकित हो गए, सबने सोचा की यह इतना गोरा कैसे हो गया, उसका भाई भी जलन के मरे खुद को रूक नहीं पा रहा था, तभी दिनेश ने कहा की गाओं वालों, आज के बाद कुछ भी चीज की जरुरत है, तो मुझे बताओ, मैं ज़रूर लेकर दूँगा, ठीक है। अब आप लोगों चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है।

फिर दूसरे दिन गाओं के एक किसान का एक बछड़ा खो गया, यह देख कर किसान का लड़का बीमार पद गया, क्योंकि उसे बछड़े से काफी लगाव था, यह सब देख कर किसान भी परेशान हुआ, तभी उसे याद आया की दिनेश ने कहा था की उससे जो छहों मांग सकता हूँ, तो क्यों न उससे कहूँ की मेरा बछड़ा खोज निकले।

यह सोच कर किसान दिनेश के पास गया, और उसे पूरी बात बताया, दिनेश ने कहा की भाई आप चिंता ना करो आपको कल सुभे बछड़ा मिल जायेगा, अभी आप निश्चिंत हो कर घर जाओ।

बॉस फिर रात को दिनेश वापस जादुई नदी के पास गया और किसान का बछड़ा को मांगने लगा, नदी ने थोड़ी देर मैं किसान का बछड़े को ला दिआ, इससे दिनेश खुश हुआ और नदी को प्रणाम करके वहां से चला गया।

दूसरे दिन सुभे दिनेश का यह काम देखकर सब लोग काफी खुश हुए और वाह वाह किआ, यह सब कुछ देख कर दिनेश का भाई सुरेश बहुत गुस्सा हुआ, और मन ही मन यह सोचने लगा की इसे यह सब कुछ कैसे मिल जाता है ? वो भी बिना परिश्रम किए ? पता लगाना पड़ेगा आखिर माजरा क्या है।

बस फिर कुछ दिन बीत गए और एक दिन गाओं के मुखिआ का बचा खू गया, और इससे मुखिआ बहुत परेशान था, दिन भर खोज करने के बाद मुखिआ का बचा कहीं नहीं मिला, पजीर मुखिआ को याद आया दिनेश की, तो वो दिनेश के पास गया, और अपनी बात कहा।

और दिनेश ने भी हमेशा की तरह मुखिआ को कल सुभे तक इंतजार करने को कहा, लेकिन यहाँ पर दिनेश का भाई सुरेश दोनों की बात को चुप कर सुन रहा था, और सुरेश ने तय किआ की आज इसका पता लगा कर ही रहेगा।

रात हुई तो दिनेश जादुई नदी के तरफ निकल पड़ा, और उसका पीछा करते हुए सुरेश भी जादुई नदी के पास पहुंच गया, वहां दिनेश को जादुई नदी से बात करते हुए देखा, और उससे मुखिआ का बचा लेते हुए भी देखा।

दिनेश के जाने के बाद सुरेश भी जादुई नदी के पास गया और कहा ” हे जादुई नदी मुझे कुछ पैसा चाहिए, मुझे पैसा दो ” इतना कहने के बाद नदी से कुछ रुपए निकल कर सुरेश के सामने आगये, यह सब देख कर सुरेश बहुत खुश हुआ, लालच मैं ुश्का खुशी का ठिकाना नहीं रहा, तभी जादुई नदी से देवी बहार निकली और कहा।

सुनो अगर तुम अपने दुश्मन के लिए कुछ मांगोगे तो उसका दोगुना तुम्हें मिलेगा, तो सुरेश बोला की मैं दुश्मन के लिए भी क्यों कुछ मांगने लगा ? मैं तो अपने लिए मांगूंगा। यह कहकर सुरेश वहां से चला गया।

अपने घर पहुंचने के बाद सुरेश सारी बातें अपने पत्नी को बताया, उसका पत्नी भी लालची थी और इसलिए उसने कहा की इससे तो हम आमिर हो जायेंगे, लेकिन दिनेश जितना नहीं ! उसके पास गाओं वाले है, उसका गाओं मैं इज़्ज़त बन चुका है, उसका नाम बन चुका है, लोग तो उसे दानी कहते है।

सुरेश ने कहा, तुम चिंता ना करो इसका भी उपाय है मेरे पास, बस तुम कल देखो क्या होता है, न रहेगा दिनेश और न रहेगा उसका नाम। यह बोल कर सुरेश कल रात का इंतजार करने लगा।

दूसरे दिन रात हुई और सुरेश जादुई नदी के तरफ निकल पड़ा, नदी के पास पहुँच कर उसने कहा की हे जादुई नदी मेरा भाई मुझ से कई ऊपर है, मुझसे ज्यादा नाम है उसका , और मुझसे ज्यादा सुन्दर भी है, तो आप ऐसा करें की उसे अधमरा कर दे, इतना कहने के बाद नदी से आई, और कहा की लालची इंसान तुमने गलती करदी, मे ने पहले ही कहा था, की अगर तुम अपने दुश्मन के लिए कुछ मांगोगे तो उसका दोगुना तुम्हें मिलेगा, तुमने अपने दुश्मन को अधमरा करने की इच्छा जताई, और इसका फल स्वरूप तुम्हें पूरा मरना होगा। यह कहने के बाद जादुई नदी का देवी चली गई, और सुरेश को मरने से कोई बचा नहीं सका।

उपदेस : दादी माँ केहेती है :

दोस्तों लालच बुरी बला होती है, हमारे पास जितना है उतने ही मैं खुश रहना चाइए, किसी को मार कर किसका धन छीन कर हमें क्या हासिल होने वाला है, हो सकता है, यह सब हमें कुछ दिनों की या कुछ महीनों की खुशीआं दे, लेकिन आखिर मैं जो परिणाम हमें भुगत न पड़ता है, वो भयंकर होता है, इसलिए कभी भी लालच न करे।

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